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Sunday, April 22, 2012

टेसी थॉमस



बचपन में सोचा था कि एक दिन रॉकेट बनाऊंगी
टेसी थॉमस
सफलता के बाद कितनी खुशी हुई?
मुझे बहुत खुशी हुई। हम पिछले तीन वर्षो से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। यह टीम वर्क है, जिसमें सैकड़ों छोटे-बड़े वैज्ञानिकों और टेक्नीशियनों ने कार्य किया। अग्नि-3 का जब परीक्षण हुआ था, तो वह पहली बार में विफल हो गया था। इसलिए इस बार नतीजे आने तक हमारी सांसें अटकी रहीं, पर हमारी टीम को अपने काम पर पूरा विश्वास था और अंतत: मनमाफिक नतीजा सामने आया।
क्या शुरू से ही आपका लक्ष्य मिसाइल वुमन बनने का था ?
विज्ञान के आविष्कारों में मेरी रुचि शुरू से ही थी। जब स्कूल में पढ़ती थी, तो उन दिनों नासा का अपोलो मिशन चांद पर उतरने की तैयारी कर रहा था। मुङो इन खबरों में बड़ा आनंद आता था। मैं सोचती थी कि एक दिन मैं भी ऐसा रॉकेट बनाऊंगी, जो आसमान में बुलंदियों को छू लेगा। इंजीनियरिंग के बाद मैं डीआरडीओ में आई, तो मुङो अग्नि प्रोजेक्ट के लिए चुना गया। फिर तो मेरे सपनों को पंख लग गए।
अग्नि परियोजना में आपकी भूमिका क्या है?
अग्नि-2 से ही बतौर वैज्ञानिक जुड़ी रही हूं। अग्नि-3 और 4 में मेरी भूमिका पूरी तरह से परियोजना के निदेशक की थी। अग्नि-5 में मैं मिशन निदेशक हूं। इसमें अग्नि के डिजाइन, निर्माण से लेकर प्रक्षेपण तक के कार्य की देखरेख और सही तरीके से निष्पादन सुनिश्चित करना होता है।
क्या आपकी पारिवारिक पृष्ठभूमि विज्ञान की थी?
नहीं, मेरे पिता एकाउंटेंट थे। मां शिक्षित महिला हैं, लेकिन उन्होंने कभी नौकरी नहीं की। यह जरूरी नहीं है कि परिवार की जैसी पृष्ठभूमि हो, वैसा ही कार्य किया जाए। मेरे पति नौसेना अधिकारी हैं, मैं डीआरडीओ की वैज्ञानिक। मेरे बेटे ने अभी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की है। वह किस क्षेत्र में करियर बनाएगा, हमें नहीं पता।
अग्नि-5 की तैयारियों के दौरान क्या-क्या दिक्कतें आईं?
दिक्कत जैसी कोई बात नहीं। रुकावटें आती हैं, लेकिन उन पर चर्चा होती है और उन्हें सुलझा लिया जाता है। हां, जब 18 अप्रैल की सुबह अग्नि को लांच करने  की पूरी तैयारियां हो चुकी थीं, लेकिन मौसम की खराबी के कारण लांचिंग स्थगित करनी पड़ी, तो बड़ी निराशा हुई। मेरी मां मुङो बार-बार फोन करके पूछती रहीं कि बेटा, क्यों नहीं छोड़ रही मिसाइल, क्या कुछ खराबी आ गई? हमारी पूरी टीम प्रार्थना करती रही। अंतत: 19 अप्रैल को इसे लांच करने में हम सफल रहे।
क्या महिला वैज्ञानिकों के लिए यह कठिन क्षेत्र है?
ऐसा कुछ भी नहीं है। चुनौतियां हर जगह हैं, मुश्किलें हर जगह हैं। हां, अग्नि की तैयारियां जब अंतिम चरण में होती हैं, तो न हमें घर-परिवार देखने का मौका मिलता है और न ही ढंग से खाने-पीने और सोने का। लेकिन आजकल तो ऐसा सभी क्षेत्रों में जिम्मेदारी के पदों पर बैठे सभी लोगों के साथ होता है।
आपके साथ और कितनी महिला वैज्ञानिक कार्य कर रही हैं?
अग्नि प्रोजेक्ट एक बड़ी परियोजना है। इसमें दर्जनों प्रयोगशालाएं लगी हुई हैं, जिनमें तकरीबन एक हजार साइंटिस्ट और तकनीशियन शामिल होंगे। इसमें करीब डेढ़-दो सौ महिलाएं भी हैं। सीधे तौर पर मेरे साथ ही करीब आधा दर्जन महिला साइंटिस्ट कार्य कर रही हैं।
क्या डीआरडीओ में महिला वैज्ञानिकों के लिए भर्ती और प्रोन्नति में प्राथमिकता दी जाती है ?
नहीं, महिलाओं और पुरुषों की भर्ती और कामकाज के नियम समान हैं।
अब अगला कदम क्या है?
अभी अग्नि के और परीक्षण होने बाकी हैं। उन्हें अंजाम देंगे। सामरिक जरूरतों के मद्देनजर अग्नि परियोजना चलती रहेगी। अग्नि के साथ ही मेरा बाकी सफर भी जारी रहेगा।
अग्नि का सबमैरीन वर्जन तैयार किया जाना है, क्सा उसका नेतृत्व भी आप ही करेंगी?
मैं अग्नि परिवार के साथ हूं। जो भी जिम्मेदारी मुङो दी जाएगी, उसे पूरा करूंगी।
आपने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नेतृत्व में अपना करियर शुरू किया था, अपनी कामयाबी का कितना श्रेय आप कलाम साहब को देती हैं?
बिल्कुल, इसका काफी श्रेय उन्हें जाता है। जब मैं अग्नि में आई थी, तो इंजीनियरिंग करके निकली ही थी। उनके साथ कार्य करने से मुङो आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। डॉ. कलाम महान हैं। लाखों नौजवानों की भांति वह मेरे भी रोल मॉडल हैं। मैंने तो उन्हें अपना गुरु माना है और ताउम्र मानती रहूंगी।  भले ही लोग मुङो मिसाइल वुमन कहें, लेकिन डॉ. कलाम के सामने मेरी हस्ती कुछ भी नहीं।
(साभार -हिन्दुस्तान )

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