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Sunday, September 25, 2011

अन्ना हजारे आन्दोलन पर विशेष



उम्मीदों के साथ जिम्मेदारिया भी बढ़ी
“मै  अन्ना हूँनारे की गरिमा बरक़रार रखनी होगी
इतिहास अपने आप को फिर से दोहरा रहा है जब गाँधी जी के बाद एक बार फिर से एक सत्य और अहिंसा के पुजारी अन्ना हजारे ने १२ दिनों में पुरे सिस्टम को हिला के रख दिया|जनलोकपाल बिल के आन्दोलन से हम सभी की आशाये उम्मीदे बढ़ी है |पिछले १५ दिनों से मुझे भी इस आन्दोलन से किसी किसी रूप में जुड़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ | इन दिनों मैंने यह महसूस किया की भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई आसन नहीं है |देश में पिछले ६४ सालो से फैला भ्रष्टाचार आसानी से ख़त्म होने वाला नहीं है |जनलोकपाल बिल बड़े स्तर पर इसे कम करने में सहायक जरुर हो सकता है पर  भ्रष्टाचार  से निजात पाने के लिए हम सब को जागरूक होना पड़ेगा क्योकि वास्तव में इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार हम लोग ही है |हम लोग के व्यवहार में यह शामिल हो गया है ,हमें एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए की अगर हम समाधान का हिस्सा नहीं है तो हम ही समस्या है|इसलिए अब हमें संकल्प करना पड़ेगा की हम इसे जडमूल से खत्म कर देगे |अन्ना जी के आन्दोलन को सार्थक समर्थन देने के लिए हमें अपनी कथनी और करनी एक करनी होगी ,शुद्धा आचार शुद्धा विचार रखने होगे तभी हम मै अन्ना हूँका नारा बुलंद कर सकेगे क्योकि अन्ना सिर्फ एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक विचार है| उनके प्रति और देश के प्रति यही सबसे बड़ा समर्थन होगा |अन्ना जी ने अपना अनशन तोड़ते समय यही बात कही की सिर्फमै अन्ना हूँ” की टोपी , टी शर्ट पहनने से कुछ नहीं होगा इसके लिए हमको अपने आप को बदलना होगा तथा खुद भी हमेशा भ्रष्टाचार से दूर रहना होगा तभी हम एक नए भारत का निर्माण कर सकते है||देशवासियो को यह ध्यान रखना होगा की “ मै अन्ना हूँ” का अपमान होने पाए | अब हम सब एकजुट है और देश में जो माहौल बना है वो बना रहे इसलिए हमें और भी ज्यादा जिम्मेदार बनना होगा |तभी हमारा का भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना पूरा होगा|
जनलोकपाल पर जिस तरह से देश की जनता घरो से निकल कर सडको पर गई उससे लगता है की अब जनता जाग रही है और परिवर्तन चाहती है |इस भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ लोग एक बेदाग नेतृत्व चाहते थे जो उन्हें मिला अन्ना हजारे के रूप में | सरकार ने जितना इस आन्दोलन को दबाने की कोशिश की यह बढ़ता गया ,मनीष तिवारी ,कपिल सिब्बल जैसे लोगो ने अन्ना पर जितना कीचड़ उछाला  देश के लोगो का अन्ना पर विश्वास और ज्यादा बढता गया |देश के पढ़े लिखे युवा इस बात को समझते थे और वो लोग सडको पर गए | इस भ्रष्ट तंत्र की वजह से पिछले ४४ सालो से लोकपाल बिल संसद ने अटका पड़ा है पर किसी सरकार ने  इसे गंभीरता से नहीं लिया|| देश में लगातार घोटाले होते रहे और हमारी संसद मौन रही कभी इस पर मजबूत कानून बनाने की नहीं सोची ||अब जब देश की जनता जाग गई है तो फिर भी  नेता लोग इस पर  राजनीती करने से बाज नहीं   रहे है ,अभी भी ये लोग इसे आसानी से कानून नहीं बनने देगे |
आज हमारे देश का लाखो करोड़ रुपया कालेधन के रूप में विदेशो में जमा है और सरकार  उसे लाने के लिए गंभीर नहीं है ,जिन लोगो का काला धन स्विस बैंक में जमा है आज तक उनके नाम उजागर नहीं किये गए ||आज तक इस मुद्दे पर संसद में कोई कानून नहीं बनाया जा सका ||बाबा रामदेव ने इस मुद्दे पर आन्दोलन किया और उनके आन्दोलन को कुचल दिया गया |राजनेता कहते है की संसद और सांसद सर्वोच्च है पर अगर वो जनता की भलाई के लिए काम नहीं करेगी तो जाहिर है किसी किसी अन्ना को तो आगे आना ही पड़ेगा ||आज देश की स्थिति यह है की सांसद चुनाव के बाद जनता को भूल जाते है ,बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार  करते है ऐसे में जनता तो सडको पर आएगी ही||सब कुछ जानते हुए भी हमारे ईमानदार प्रधानमंत्री कुछ नहीं कर पा रहे है उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी इतने बड़े पैमाने पर देश को लूट रहे है और वो चुप बैठे है ||वो कुछ लोगो के हाथ की कठपुतली बन कर रह गए है ||ऐसे में लोगो को अन्ना हजारे के रूप में एक आशा दिखी , भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी मुहीम और जनलोकपाल बिल को लेकर युवाओ में एक विश्वास जगा की अब हम सब मिलकर कुछ कर सकते है| ||एक रिपोर्ट के मुताबिक आज  हमारा देश  भ्रस्त देशो की सूची में पुरे एशिया में चौथे स्थान और विश्व में ८४ वे स्थान पर है |||पिछले १९ सालो में हमारे देश में ७३ लाख करोड़ के घोटाले हुए ||आज एक तरफ देश के ३० करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे है ,महगाई अपने चरम पर है वही देश में एक से बढ़कर एक बड़े घोटाले हो रहे है ||यह इस देश का दुर्भाग्य है की आज तक इन भ्रस्त नेताओ को सजा नहीं हुई ,कभी कोई कड़ा कानून नहीं बन पाया ||ऐसे में अब देश को एक मजबूत  जनलोकपाल  कानून  की जरूरत है जिससे इस भ्रष्ट तंत्र पर और भ्रष्टाचार पर शिकंजा कसा जा सके ||||
आजादी के बाद पहली बार एसा हुआ है जब लोग इतने बड़े पैमाने पर एकजुट हुए है और सरकार को जनता के सामने झुकना पड़ा |इसलिए अब हमें अपनी एकजुटता को हमेशा बनाये रखना है इन नेताओ के गलत मंसूबो को पूरा नहीं होने देना है और सडक से संसद तक संघर्ष करना पड़े तो वो भी करना है| मै आजादी के आन्दोलन के दौरान तो नहीं था पर मैंने देश में ,युवाओ में राष्ट्रीयता की इतनी भावना कभी नहीं देखी ,इतने तिरंगे कभी सडको पर नहीं देखे ,देश के प्रति इतना सम्मान ,जोश ,नेताओ के प्रति गुस्सा कभी नहीं देखा ||वास्तव में ये लोग किसी पार्टी के नहीं थे ये सिर्फ आम आदमी थे जिनमे गुस्सा था इस भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ ||सरकार ने इन आम लोगो को १२ दिन तक आजमाने के नाकाम कोशिश की  लेकिन जब आम आदमी का गुस्सा बढ़ा तब सरकार को लगा की अब कुछ करना ही पड़ेगा और सांसदों ने लोकसभा में चर्चा की और एक प्रस्ताव पारित करना पड़ा| |वास्तव में यह देश की जनता की आधी जीत है, यह तो एक बड़े संघर्ष की शुरुआत है क्योकि अभी जनलोकपाल को पारित करने के लिए बड़ी लम्बी लड़ाई लड़नी पड़ेगी ये राजनेता इसे आसानी से पास होने नहीं देगे |अभी तो यह बिल स्टेंडिंग कमेटी में जायेगा जहाँ लालू यादव ,अमर सिंह जैसे लोग इसके सदस्य है ,अभी इस पर बहुत राजनीती होगी पर इस आन्दोलन से देश के जनता एक साथ आई  है देश के युवाओ में इस देश को लेकर सोच बदली है एक राष्ट्रीयता की भावना जाग्रत हुई  है यही इस आन्दोलन की सबसे बड़ी कामयाबी है | इस पूरे आन्दोलन में मीडिया ने बहुत ही सार्थक और सकारात्मक भूमिका निभाई ||उसने देश के लोगो को भ्रष्टाचार के विरुध जगाने का काम किया ||
इस आन्दोलन से एक बात और साफ हो गई है की गाँधी जी की विचारधारा आज भी प्रासंगिक है और हमेशा रहेगी |अहिंसा से बड़ा कोई हथियार नहीं हो सकता ||इस आन्दोलन में पुरे देश में कही कोई हिंसा नहीं हुई ये हमारे समाज की ,जनता की सबसे बड़ी जीत है|
शशांक द्विवेदी
(स्वतंत्र लेखक और पत्रकार )

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